कार्यकर्ताओ के दर्द की अनदेखी के बीच 2019 में रतलाम झाबुआ संसदीय सीट जितने की रणनीति होगी शुरू।

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रतलाम(खबरबाबा.कॉम)। भारतीय जनता पार्टी का आम कार्यकर्ता अंदरूनी रूप से संतुष्ट नही है । शासन एवं प्रशासन स्तर पर सुनवाई नही होना जनप्रतिनिधियों द्वारा उपेक्षित होने और उनकी समस्याओं निराकरण नही होने की हज़ारों शिकायतों के बीच गुरुवार को केंद्र सरकार के मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह 2019 में रतलाम संसदीय सीट पर फतह हांसिल करने के लिए कार्यकर्ताओ एवं पार्टी नेताओं से रूबरू होने आ रहे है ।
वर्तमान में रतलाम झाबुआ जिले में भाजपा ने अधिकतर निकायों में अपना परचम लहराया है लेकिन 2014 में रतलाम झाबुआ सीट पर ऐतिहासिक जीत के बाद तत्कालीन सांसद दिलीपसिंह भूरिया के निधन पर हुए उपचुनाव में पार्टी की हार पर इसे गंभीरता से लेते हुए हाई कमान ने इस सीट को पुनः हांसिल करने के लिये अभी से कवायद शुरू कर दी है । पार्टी की इस रणनीति के बीच अब कार्यकर्ताओ का दर्द छलकने लगा है । पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओ का दर्द यह है कि जो कार्यकर्ता चुनावो में मेहनत कर पार्टी को विजय हांसिल करवाता है उन्ही कार्यकर्ताओ को बाद में हाशिये पर डाल दिया जाता है । कार्यकर्ताओ को कोई भी बात सार्वजनिक रूप से नही कहते हुए पार्टी के मंच पर ही उठाने की इजाज़त है लेकिन आम कार्यकर्ताओ की आवाज़ को दबा दिए जाने की शिकायत आम हो गई है । पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि आज नीचे से ऊपर तक भाजपा की सरकार है लेकिन अधिकारी उनकी सुनते नही है ।जनप्रतिनिधि से कहते है तो वे भी अधिकारियो से उनकी समस्या के संबंध में बात करने के बजाय टालने की प्रवत्ति दर्शाते हैं । जब जनप्रतिनिधि ही कार्यकर्ताओ को तवज्जो नही देते तो जिले के अधिकारी भी उनकी परवाह क्यों करेंगे । जनता से वोट मांगने कार्यकर्ता ही घर घर जाते है और जनता कार्यकर्ताओ से ही अपने समस्याओ के समाधान की उम्मीद करती है लेकिन वे अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के रवैये के कारण असहाय महसूस कर रहे है । हाल ही में सैलाना नगर परिषद चुनाव में पार्टी की हार का प्रमुख कारण ही कार्यकर्ताओ की उपेक्षा और पार्टी की गुटबाज़ी रही है । नही तो क्या कारण है कि वार्डो में बहुमत मिलने के बावजूद पार्टी अध्यक्ष का उम्मीदवार चुनाव हार जाए । सैलाना का असंतोष उभरकर सामने आ गया और कमोबेश पूरे क्षेत्र में यही स्थिति है । कार्यकर्ताओ का आक्रोश अंदर ही अंदर उबल रहा है और अगर पार्टी इसे नज़र अंदाज़ कर 2019 में संसदीय सीट जीतने का सपना संजो रही है तो यह उसके लिए टेढ़ी खीर ही साबित होगा ।

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