बाल विवाह रोकने हेतु उड़नदस्ते गठित

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रतलाम 06मई (खबरबाबा. काम)। मध्य प्रदेश शासन सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार प्रत्येक निकायस्तर पर होने वाले विवाह आयोजनों में बाल विवाह को रोकने हेतु उडनदस्तों का गठन किया गया है। कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान ने अक्षय त़ृतीया पर आयोजित होने वाले सम्मेलनों में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने एवं उसे समाप्त करने हेतु आम जनता व नागरिकों से अपील की है, कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है, कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को समाप्त करने में प्रशासन एवं पुलिस को अपना पूर्ण सहयोग दें। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अधीन बाल विवाह एक दण्डनीय अपराध है।
बाल विवाह के अपराध पर इसमें सहयोग व प्रेरित करने वाले परिजन, पण्डित, नाई,बराती, बैण्ड- बाजे वाले, मेरिज ब्यूरो, शादियां कराने वाले बिचौलियों व अन्य सभी दोषियों को2 साल अवधि का कारावास व एक लाख रूपये के अर्ण्दण्ड से दण्डित किया जा सकता है। बाल विवाह रोकने हेतु जिला, विकासखण्ड, तहसील स्तर पर दल गठित किए गए है। जिसमें संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार, थाना प्रभारी, परियोजना अधिकारी, आईसीडीएस, संबंधित सेक्टर पर्यवेक्षक द्वारा समय-समय पर आयोजित होने वाले समारोह, कार्यक्रमो में किसी भी स्थिति में कोई बाल विवाह न होने पाए यह सुनिश्चित करेगें।
बाल विवाह की घटनाओं की रोकथाम हेतु विवाह कार्यक्रम के सभी सेवा प्रदाता जैसे सामुहिक विवाह संस्थाएं, मेरिज गार्डन, टेंट हाउस मालिक, खाना बनाने वाले रसौईये,केटरर्स, पण्डित, पत्रिकाएं छापने वाले प्रेस इत्यादि, वर-वधु विवाह करने के पूर्व यह सुनिश्चित कर ले, कि वर-वधु की उम्र कानूनी रूप से शादी लायक है। बाल विवाह में उपस्थित सभी व्यक्ति, सेवा प्रदाता अधिनियम के अनुच्छेद10 के तहत बाल विवाह को बढावा देने अथवा उसमें सहायता करने वाले की श्रेणी में मान्य होकर अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही के पात्र होते है। बाल विवाह की जानकारी मिलने पर कोई भी व्यक्ति या लड़का/लड़की स्वयं भी सूचना हेल्पलाईन नम्बर 1098, 100 पुलिस एवं नजदीकी आंगनवाड़ी केन्द्र पर भी दे सकते है। सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम भी गोपनीय रखा जाता है।

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