मध्यप्रदेश: सुप्रीम कोर्ट ने कल शाम 5 बजे तक बहुमत परीक्षण का आदेश दिया

indresh98kumar@gmail.com
4 Min Read

नई दिल्ली, 19मार्च2020/ मध्य प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कल मध्य प्रदेश विधानसभा का सत्र फिर से बुलाया जाए. अदालत ने कहा कि कमलनाथ सरकार कल शाम 5 बजे तक बहुमत हासिल करे. सुप्रीम कोर्ट ने सदन की कार्यवाही का वीडियोग्राफी कराने का निर्देश दिया है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 16 विधायकों पर विधानसभा में आने का कोई दबाव नहीं होगा. अदालत ने कहा कि कर्नाटक और मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक बागी विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें.
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि विधानसभा की कार्यवाही लाइव प्रसारण किया जाएगा. अदालत ने कहा कि विधानसभा सत्र का एक मात्र एजेंडा फ्लोर टेस्ट करवाना होगा. कोर्ट ने कहा कि सभी अधिकारी ये सुनिश्चित करें कि किसी भी तरह आदेश का उल्लंघन न हो.
क्या-क्या दलीलें
राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आज भी अदालत में दलीलें रखीं। उन्होंने दोहराया कि फ्लोर टेस्ट करवाना है या नहीं, यह स्पीकर के विवेक पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि विधायकों की गैरमौजूदगी से सदन में संख्याबल कम रह जाएगा।
जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि ऐसे में क्या किया जाए, क्या स्पीकर को विधायकों के इस्तीफे पर फैसला नहीं लेना चाहिए। इसपर सिंघवी ने सुझाव दिया कि स्पीकर पर इस पर फैसला लेकिन के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
इसपर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि बागी विधायक अपनी इच्छा से काम कर रहे हैं या नहीं इस पर पर्यवेक्षक नियुक्त करने किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने से बागी विधायकों के किसी डर से कैद में रहने की बात की सच्चाई भी सामने आ जाएगी। विधायकों की तरफ से पेश हुए वकील मनिंदर सिंह भी इस बात पर राजी हो गए।
बुधवार को क्या हुआ?
मध्यप्रदेश के सियासी संकट पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को विधानसभा स्पीकर से पूछा कि वह कांग्रेस विधायकों के इस्तीफे पर फैसला लेने में विलंब क्यों कर रहे हैं और इस पर फैसला कब तक होगा। इस पर स्पीकर के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, वह इस संबंध में गुरुवार को बता पाएंगे। भाजपा की ओर से कमलनाथ सरकार को तत्काल बहुमत परीक्षण का निर्देश देने के लिए दायर याचिका पर चार घंटे चली बहस के बाद गुरुवार सुबह 10:30 बजे फिर सुनवाई टाल दी गई।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने स्पीकर से पूछा, आपने 16 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार क्यों नहीं किए? संतुष्ट नहीं तो नामंजूर कर सकते थे। जस्टिस चंद्रचूड़ ने 16 मार्च को विधानसभा का बजट सत्र स्थगित करने हैरानी जताते हुए पूछा, बजट पास नहीं होगा तो राज्य का कामकाज कैसे होगा? पीठ ने कहा, हम यह तय नहीं कर सकते कि सदन में किसे बहुमत है। यह काम विधायिका का है। सांविधानिक अदालत के तौर पर हमें अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है।
याचिकाकर्ताओं के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, इस्तीफे के बाद सरकार अल्पमत में है। वहीं, सिंघवी ने कहा, दलबदल कानून से बचने के लिए इस्तीफा एक चाल है। सभी विधायकों के इस्तीफे दो पंक्ति के थे। ज्यादातर एक व्यक्ति ने लिखे थे। मध्यप्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है, जिसमें कथित रूप से भाजपा द्वारा बंदी बनाए 16 बागी विधायकों तक पहुंच देने की मांग की गई है।
(फोटो फाइल)

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *