
रतलाम,16नवम्बर(खबरबाबा.काम)। जिले के ग्राम धराड में मंगलवार दोपहर को सांसद गुमानसिंह डामोर और विधायक दिलीप मकवाना के काफिले का घेराव और नारेबाजी करने के मामले में हिरासत में लिए गए जयस नेताओं सहित पांच लोगों को आज भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोर्ट में पेश किया गया। सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार सांसद और विधायक के काफिले को रोककर घेराव एवं नारेबाजी के मामले में बिलपांक थाना पुलिस ने जयस के पांच नेताओं को गिरफ्तार किया था। जिन्हे कड़ी सुरक्षा में बुधवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने पांचों को जिनमें डॉ. आनंद राय, डॉ. अभय ओहरी, विलेश खराड़ी, अनिल निनामा और गोपाल वाघेला शामिल है, को जेल भेज दिया।
गिरफ्तारी के विरोध में आदिवासी संगठनों के संभावित विरोध को देखते हुए बुधवार सुबह से ही कोर्ट चौराहे और प्रमुख मार्गों पर पुलिस फोर्स की तैनाती की गई थी। एसपी अभिषेक तिवारी, एएसपी सुनील पाटीदार, सीएसपी हेमंत चौहान, टीआई किशोर पाटनवाला, राजेंद्र वर्मा आदि सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी रखे हुए थे। औद्योगिक क्षेत्र थाना प्रभारी अयूब खान और बिलपांक थाना प्रभारी ओपी सिंह गिरफ्तार नेताओं को कोर्ट लेकर पहुंचे।
यह है मामला
मंगलवार दोपहर को रतलाम के धराड़ में जयस कार्यकर्ताओं ने सांसद गुमान सिंह डामोर और विधायक दिलीप मकवाना के काफिले को रोक कर जमकर हंगामा किया था। दरअसल सांसद और विधायक बिरसा मुंडा जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रतलाम पहुंच रहे थे। इसी दौरान धराड़ गांव में जयस कार्यकर्ताओं की रैली निकल रही थी। सांसद गुमान सिंह डामोर और विधायक दिलीप मकवाना के काफिले को देखकर अचानक जयेश कार्यकर्ताओं ने काफिले को रोककर घेराव कर दिया। भीड़ ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।हंगामा बढ़ने की सूचना मिलने पर कलेक्टर और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जयस कार्यकर्ताओं को हटाया और सांसद और विधायक के काफिले को कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना किया था। हंगामे के दौरान कलेक्टर का गनमैन घायल भी हुआ था।
कोर्ट परिसर बना छावनी
बुधवार सुबह 9 बजे से ही कोर्ट परिसर और आसपास के क्षेत्र को छावनी बना दिया गया। छत्रिपुल और कान्वेंट स्कूल की ओर से आने वाले रोड के साथ ही पुराने कलेक्ट्रेट वाले रास्ते को भी रोक दिया गया। यहां पुलिस ने बेरीकेटिंग कर केवल उन्हें ही अंदर आने की अनुमति दी गई जिन्हें कोर्ट, जिला पंचायत में काम था। सुरक्षा के बीच वाहन से डॉ. आनंद राय, डॉ. अभय ओहरी, विलेश खराड़ी, अनिल निनामा और गोपाल वाघेला को तीन वाहनों से लाया गया। सीएसपी, टीआई के अलावा भारी संख्या में पुलिस बल वहां मौजूद रहा। पांचों को सीधे सीजेआई के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेजने के आदेश हुए। इसके बाद उन्हें फिर से कड़ी सुरक्षा के बीच वाहनों में बैठाकर पुलिस की अभिरक्षा में वहां से निकाला गया।



