रतलाम: मुख्यमंत्रीजी अपना वादा कब पूरा करोगे ? परेशानी में उलझे हजारों मध्यमवर्गीय परिवार उम्मीद से आपकी और देख रहे हैं….इनका क्या कसूर?

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|फाइल फोटो
फाइल फोटो

रतलाम,08अप्रैल(खबरबाबा.काम)। मुख्यमंत्रीजी आप अपना वादा कब पूरा करोगे? हमें इस परेशानी से कब मुक्ति दिलाओगे? ना हमारे प्लाट की लीज बढ़ रही है। ना नामांतरण हो रहे हैं और ना ही निर्माण अनुमति मिल रही है। हम करें तो क्या करें…. यह सवाल आज हजारों विभाजित प्लॉटधारको के मन में उठ रहा है।


मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा नगर निगम चुनाव के दौरान विभाजित प्लाट के मामले के निराकरण का वादा किया गया था‌। लेकिन रतलाम में की गई घोषणा के 9 माह बाद भी अभी तक भी इस मामले में कोई आदेश नहीं हो पाया है।

हजारों परिवारों के आवास जैसी मूलभूत आवश्यकता से जुड़े विभाजित प्लाट के मुद्दे को सबसे पहले खबरबाबा.काम ने प्रमुखता से उठाया। इसके बाद शहर विधायक चेतन्य काश्यप ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को विभाजित प्लाट की लीज वृद्धि, नामांतरण और भवन निर्माण की अनुमति नहीं मिलने से परेशान हो रहे हजारों परिवार की समस्या से अवगत कराया। विधायक श्री काश्यप के प्रयास के बाद नगर निगम चुनाव के दौरान रतलाम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सभा में विभाजित प्लाट के मामले के निराकरण की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री की घोषणा के 9 माह बाद भी नगरीय प्रशासन मंत्रालय ने मामले के निराकरण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

नगर निगम चुनाव के बाद शहर विधायक चेतन्य काश्यप दो बार भोपाल जाकर नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह से मिलकर अविकसित कालोनियों और विभाजित प्लाट के मामले के शीघ्र निराकरण की मांग भी कर चुके हैं। जिसके बाद ऐसा लग रहा था कि इस मामले को लेकर ठोस कदम उठाए जाएंगे, लेकिन अभी तक कुछ भी नहीं हुआ।

विभाजित प्लाट पर लीज वृद्धि, नामांतरण और भवन निर्माण अनुमति नहीं मिलने के कारण शहर में हजारों परिवार परेशान है। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के बाद इन हजारों मध्यमवर्गीय परिवारों में एक उम्मीद की किरण जागी थी, लेकिन अभी तक मामले का निराकरण नहीं होने से सभी निराश है। सभी को आवास उपलब्ध कराने का वादा करने वाली सरकार हजारो मध्यमवर्गीय परिवार के आवाज से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे का मुख्यमंत्री कीघोषणा के बाद भी समाधान क्यों नहीं कर पा रही है ,यह समझ से परे है। जिन लोगों ने इस नियम के लागू होने के पहले विभाजित प्लाट या उस पर बने मकान क्रय किए हैं उनका आखिर क्या कसूर है? प्रदेश शासन अवैध कॉलोनी को वैध कर रही है लेकिन अपने खून पसीने की कमाई से वैध कालोनियों में मकान और प्लाट खरीदने वाले लोगों की इस समस्या पर आखिर ध्यान क्यों नहीं दे रही है ?

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