
रतलाम, 9 सितंबर (खबरबाबा.काम)। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. का 56 वां जन्मदिन 10 सितंबर रविवार को प्रभु मिलन उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस अवसर पर सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज में प्रातः 9.30 से 12.30 बजे तक विशेष आयोजन होंगे। गुरू भक्त आचार्य भगवन को शुभकामनाएं प्रेषित कर उनका आशीर्वाद लेंगे। आयोजन को लेकर श्री संघ द्वारा विशेष रूप से तैयारी की गई है।
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी ने गुरु भक्तों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहकर उक्त आयोजन में भाग लेने का आव्हान किया है। शनिवार को मोहन टाकीज में आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने प्रवचन देते हुए प्रभु के मार्ग पर चलने के लिए सरल, शीतल और कोमल बनने की आवश्यकता जताई।
मुनिराज ने कहा कि गौतम स्वामी के अंदर सरलता थी, वह महावीर के प्रिय बन गए थे, अर्जुन के अंदर सरलता थी,वह श्री कृष्ण के प्रिय बन गए और हनुमानजी के अंदर सरलता थी,इसलिए वह श्री रामचंद्रजी के प्रिय बन गए थे। हमें हनुमान, गौतम और अर्जुन पसंद है लेकिन इन तीनों के जीवन में उनके अंदर जो सरलता थी, वह पसंद नहीं है। प्रभु से प्रार्थना कीजिए कि मैं हदय का सरल और स्वभाव का शीतल बनू और फिर आपके मार्ग पर चल सकू।
मुनिराज ने क्रोध का त्याग करने पर बल देते हुए कहा कि मां बालक को दूध पिलाती है, तो उसका उद्देश्य होता है बच्चे की सेहत अच्छी बने, लेकिन यदि बालक को उससे दस्त लग जाए तो मां उसे दूध नहीं पिलाएगी। ठीक इसी प्रकार क्रोध का उद्देश्य दूसरे को दिखाने का होता है। क्रोध का उद्देश्य और परिणाम खराब आता है।इससे स्वास्थ्य के साथ संबंधों पर असर पड़ता है। इसलिए आप क्रोध को त्यागकर जीवन में सरलता लाए| स्वभाव के सरल बनकर मन में कोमलता लाए। प्रवचन में बड़ी संख्या में श्री संघ के पदाधिकारी एवं श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।



