नवकार भवन में अभ्युदय चातुर्मास के अंतिम प्रवचन-इतिहास बदल नहीं सकते, पर वर्तमान सुधारोगे, तो भविष्य सुनहरा होगा – आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा

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रतलाम,27 नवंबर(खबरबाबा.काम)। परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने सोमवार को सुनहरे भविष्य के लिए वर्तमान सुधारने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता, लेकिन वर्तमान सुधारोगे, तो भविष्य सुनहरा हो जाएगा। जीव का इतिहास इच्छा के बिना जन्म, पापों भरा जीवन, संक्लेशों से भरा मन और पछतावे के साथ मरण वाला है।

सिलावटों का वास स्थित नवकार भवन में अभ्युदय चातुर्मास के अंतिम प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा इतिहास देखेंगे, तो पता चलेगा कि जीव को जहां भी जन्म लेना पडता है, वह बिना इच्छा के होता है। इच्छा कुछ होती है और होता कुछ है। जीवन भी पापों से भरा रहता है, पुण्य नहीं मिलता। मन भी संक्लेशों से मुक्त नहीं होता है और जीवन भर अफसोस बना रहता है। बाद में जब मरण होता है, तो वह भी पछतावे से भरा रहता है। इसलिए महापुरूषों ने इतिहास से परे वर्तमान को सुधारने की आवश्यकता जताई है, ताकि भविष्य सुनहरा हो जाए।

आचार्यश्री ने कहा कि इतिहास से सबक लेकर वर्तमान का सदुपयोग करना और भविष्य से आशा रखना चाहिए। जागरूक बनकर जीने वालों का भविष्य कभी नहीं बिगडता। वे तो इच्छा से जन्म लेते है, पुण्य के साथ रहते है, शांति से मन भरा रखते है और उनका मरण भी हंसते-हंसते होता है। हर व्यक्ति को चिंतन करना चाहिए कि जग में वह क्या? लेकर आया था। उसे कपडे दूसरों ने पहनाए, नाम भी दूसरों ने दिया, बडा भी दूसरों ने किया और खाने-कमाने लायक भी दूसरों ने ही बनाया। वह कुछ नहीं करता, लेकिन ये समझ लेता है कि सबकुछ उसी ने किया, जो उचित नहीं है। ज्ञानी वही होता है, तो वर्तमान में जीता है। भविष्य हमेशा वर्तमान से ही बनता है, इसलिए जीवन में केवल वर्तमान को सुधारने का लक्ष्य होना चाहिए।

किसी पंथ के नहीं पूरे संसार के होते है महापुरूष

आचार्यश्री ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा पर कई महापुरूषों का जन्म हुआ। मूर्ति पूजक समुदाय में आचार्य हेमचंद्रजी ने 7 वर्ष में दीक्षा लेकर 11 वर्ष में आचार्य बने और धर्म की खूब प्रभावना की। उन्होंने संस्कृत भाषा में करोडों श्लोकों में साहित्य रचकर भी इतिहास बनाया। उनसे प्रभावित होकर कुमारपाल राजा भक्त बने और अहिंसा एवं जीव मैत्री का प्रसार किया। इसी दिन जन्म लेकर वीर लोकाशाह बहुत बडे श्रावक हुए। उन्होने 45 लोगों के साथ संयम धारण कर भारत भ्रमण कर धर्म की प्रभावना की। जैन दिवाकर श्री चैथमलजी मसा की जयंती भी आज रही, जिन्होंने एक पागल संत की सेवा की, तो उसने कहा कि दुनिया तुम्हारे पीछे पागल रहेगी। इसके बाद चैथमलजी के पीछे लोगों को पागल होते दुनिया ने देखा है।

आचार्यश्री ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा पर सिख समाज में गुरूनानक जयंती का प्रकाश पर्व मनाया जाता है। इसी दिन महर्षि दयानंद सरस्वती का भी अवतरण हुआ। भारत की आर्य भूमि बहुत पवित्र है। इसमें ज्ञान का आगोश और चरित्र की सुगंध लेकर कई महापुरूषों ने कर्म किया। महापुरूष किसी पंथ के नहीं होते, वे तो पूरे संसार के होते है। उनका जीवन सदैव प्रेरणादायी बना रहता है।

मंदसौर में होगा फाल्गुनी चातुर्मास

परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा का आगामी वर्ष 2024 का फाल्गुनी चातुर्मास रखे जाने वाले सभी आगारों के साथ मंदसौर में होगा। इसकी घोषणा आचायश्री ने कार्तिक पूर्णिमा पर अभ्युदय चातुर्मास पूर्ण करते हुए की, जिसकी मंदसौर श्री संघ ने हर्ष-हर्ष के उदघोष के साथ अनुमोदना की। उपाध्याय प्रवर श्री जितेशमुनिजी मसा ने भी भाव व्यक्त किए। हर्षित कांठेड ने बताया कि 28 नवंबर को अभ्युदय चातुर्मास की पूर्णता पश्चात आचार्यश्री सुबह साढे नो बजे नवकार भवन से विहार कर न्यूरोड पहुंचेगे। मंगलवार के प्रवचन ब्राहम्ण बोर्डिंग में होंगे। इस मौके पर रक्षिता, सुहानी एवं प्रीशा ने स्तवन प्रस्तुत किया। प्रवचन में बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।

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