रतलाम: निजी स्कूल की मान्यता निरस्त करने की धमकी देकर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाए पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी को 4 साल की सजा

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रतलाम,30जुलाई(खबरबाबा.काम)। रतलाम के भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विशेष न्यायालय के न्यायधीश आदित्य राव ने रिश्वत लेने के मामले में रतलाम के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर चौहान को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 4 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। उस पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है।

अभियोजन के अनुसार रतलाम जिले की जावरा तहसील के ग्राम बन्नाखेड़ा में स्थित सुखदेव पांचाल के साईं पब्लिक हाई स्कूल में दिलीप सिंह ने अपने तीन बच्चों को प्रवेश दिलाया था। प्रवेश दिलाते समय उन्होंने लिखित आवेदन दिया था कि वे कुछ समय बाद बच्चों की टीसी और अंकसूची जमा करा देंगे।

स्कूल संचालक सुखदेव पांचाल ने उनसे बाद में भी टीसी और अंकसूची मांगी लेकिन उन्होंने जमा नहीं कराई और बताया कि उनके बच्चे मंदसौर जिले के ग्राम कुछडोद मे स्थित सन साइन स्कूल में पढ़ते थे, वहां से टीसी व अंकसूची नहीं दी जा रही है।

दिलीप सिंह ने कई बार सन साइन स्कूल के संचालक प्रकाश जैन से टीसी और अंकसूची देने की मांग की, लेकिन उन्हें देने से मना कर दिया था । इस पर दिलीप सिंह ने मंदसौर के जिला शिक्षा अधिकारी को आवेदन दिया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं दिया गया।

वहीं सन साइन स्कूल के संचालक प्रकाश जैन ने साईं पब्लिक हाई स्कूल के संचालक सुखदेव पांचाल की शिकायत रतलाम के तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर चौहान को की थी। रामेश्वर चौहान ने सुखदेव पांचाल से स्कूल की मान्यता रद्द करने की धमकी देकर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।

सुखदेव पांचाल ने इसकी शिकायत 2 मई 2019 को उज्जैन जाकर लोकायुक्त एसपी कार्यालय में की थी
इसके बाद वहां से सुखदेव को रिश्वत की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए वॉइस रिकॉर्ड दिया गया था। सुखदेव पांचाल ने तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर चौहान के कार्यालय में जाकर उनसे रिश्वत संबंधी चर्चा कर राशि कम करने की बात की थी।

इस दौरान रामेश्वर चौहान 15 हजार रुपये लेने पर राजी हो गए थे। बातचीत टैप करने के बाद सुखदेव पांचाल ने वॉइस रिकॉर्डर लोकायुक्त कार्यालय जमा कर दिया था।

लोकायुक्त ने रिश्वत लेते रामेश्वर चौहान को रंगे हाथ गिरफ्तार करने की योजना बनाई और 6 मई 2019 को उज्जैन से दल रतलाम पहुंचा और रामेश्वर चौहान के कार्यालय के आसपास घेराबंदी की थी। सुखदेव पांचाल ने कार्यालय में जाकर रामेश्वर चौहान को 15 हजार दिए तथा बाहर निकाल कर इशारा किया।

इशारा मिलते ही लोकायुक्त दल के सदस्यों ने रामेश्वर चौहान को रंगे हाथ गिरफ्तार कर उनके कब्जे से रुपये जब्त किए थे। प्रकरण में शासन की तरफ से पैरवी विशेष लोक अभियोजक (एडीपीओ) कृष्णकांत चौहान ने की थी।

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