रतलाम: रिंगनोद पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल… दलाल के माध्यम से अवैध वसूली की शिकायत, एसपी राहुल लोढा ने लिया एक्शन- चार पुलिसकर्मी निलंबित, एसडीओपी को सौंपी मामले की जांच

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रतलाम, 12जुलाई(खबरबाबा.काम)। जिले के जावरा सबडिवीजन अंतर्गत रिंगनोद थाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। चार युवकों ने थाने पर पदस्थ चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ दलाल के माध्यम से वसूली की शिकायत जावरा विधायक डॉ राजेंद्र पांडे और एसपी राहुल लोढा को की है। एसपी ने तत्काल एक्शन लेते हुए चारों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है और एसडीओपी को मामले की जांच सौंप दी है।

रिंगनोद पुलिस थाना क्षेत्र के ग्राम कलालिया के 4 युवाओं ने रिंगनोद थाने के आरक्षकों के खिलाफ दलाल के माध्यम से रुपए लेने के आरोप लगाए हैं। युवकों ने विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय सहित एसपी राहुल लोढा से शिकायत की है।

कलालिया के योगेश पाटीदार ने बताया कि 30 जून की रात उसकी दुकान पर प्रकाश गिरी, संतोष पुरी और रविशंकर पाटीदार बैठे थे। तभी थाने से आरक्षक बलराम पाटीदार, अजीत शुक्ला सहित दो और पुलिसकर्मी एवं रोजाना का दुर्गेश पाटीदार (वाहन चालक) आए और कहा कि तुम जुआ-सट्टा खेल रहे हो और शराब पी रहे हैं। यूवकों का कहना है कि उनका फर्जी वीडियो बनाया और थाने ले जाकर बैठा दिया। कुछ देर बाद दुर्गेश पाटीदार ने कहा चारों 20 हजार रुपए की व्यवस्था कर दो, छोटा-मोटा प्रकरण बनाकर छोड़ देंगे।

युवको ने शिकायत में बताया कि इसके बाद हमने 7 हजार और 5 हजार रुपए ऑनलाइन दुर्गेश के खाते में ट्रांसफर किए। इसके बाद हमें दुर्गेश ने कलालिया लाकर छोड़ा। अगले दिन दुर्गेश और बलराम पाटीदार बचे हुए 8 हजार रुपए लेने आए और बोले कि आधारकार्ड लेकर थाने आ जाना। हमने कहा पैसे भी ले लिए और प्रकरण भी, ऐसा नहीं चलेगा। इस पर बलराम व दुर्गेश ने गंभीर प्रकरण में फंसाने की धमकी दी।

संतोष पुरी, रविशंकर पाटीदार, प्रकाश गिरी ने कहा दुर्गेश के खाते में रुपए डालने का प्रमाण मौजूद है।
इस मामले मे दुर्गेश पाटीदार ने मीडिया से कहा कि वह रोजाना में रहता हूं। ऑटो गैरेज का काम करता हूं। उसे कोई जानकारी नहीं है। कुछ महीने पहले थाने पर वाहन अटैच किया था, जो अब हटा दिया है।

चार पुलिसकर्मी निलंबित

एसपी राहुल लोढा ने बताया कि मामले की शिकायत के बाद एक प्रधान आरक्षक सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इसमें अजीत शुक्ला, बलराम पाटीदार, सुरेंद्र और रविंद्र नाम के पुलिसकर्मी शामिल है। एक व्यक्ति शासकीय सेवक नहीं है, इसलिए एसडीओपी को मामले की जांच सौंपी है। जांच के बाद नियम अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

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