
रतलाम, 13 अगस्त(खबरबाबा.काम)। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में मोहन टाॅकीज, सैलाना वालों की हवेली में रविवार को अंतिम युवा संस्कार शिविर अत्यंत करूणामयी वातावरण में संपन्न हुआ। शिविर में आए युवाओं के साथ हर श्रावक-श्राविका की आंखों में पश्चाताप के आंसू नजर आए। आचार्य श्री ने यह आंसू वंदनीय है, विषय पर प्रेरक मार्गदर्शन दिया।
उनके आव्हान पर शिविरार्थियों ने कान पकड़कर जीवन में बचपन से लेकर अब तक हुई गलतियों और जाने अनजाने में हुए पाप के लिए प्रभु से क्षमा प्रार्थना की।

शिविर के समापन अवसर पर आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा., विशेष अतिथि और शिविर के लाभार्थी विधायक चेतन्य काश्यप सहित हजारों की संख्या में उपस्थितजनों की आंखे नम थी। आचार्य श्री ने कहा कि 5 फीट की काया में पांच अभज भव चले उतने पाप हमने इकट्ठे किए है। पश्चाताप के इन आंसुओं को बाहर आने दो और यह प्रण करो कि भविष्य में कभी गलती से भी जाने अनजाने में कोई पाप न हो। भविष्य में जब आपकी आंखों से आंसू निकले तो वह करुणा के आंसू हो, कल्पांत के आंसू हो, कृतज्ञता के आंसू हो। क्योंकि बालक रोता है, तो मां आती है और भक्त रोता है, तो स्वयं भगवान आते हैं। इसलिए यह आंसू वंदनीय है।
आचार्य श्री ने कहा कि जिनकी आंखों में दया का भाव होता है और दूसरों के दुख को देखकर आंसू निकलते हैं, वह करुणा के आंसू होते हैं। दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं है, जो रोया नहीं है। मां के पेट से जन्म लेते ही बच्चा रोता है और यदि नहीं रोता है तो उसे रुलाया जाता है। संपत्ति, शिक्षा और सफलता की धूप ने हमारी संवेदना की नदी को सूखा दिया है। हमें अपनी मातृभाषा और संस्कृति को बचाना है।
आचार्य श्री ने कहा कि हम कपड़े सफेद पहनते हैं लेकिन अंदर से साफ नहीं है। आज तक आपने जो भी अपराध किए हैं, उनके लिए मन में पश्चाताप के आंसू हो तो वह आंसू वंदनीय है। जीवन में हमें कभी किसी का उपकार भूलना नहीं चाहिए। हमने उपकार कम किए है लेकिन उपकार लिए ज्यादा हैं। भले ही सारी दुनिया देख ली हो लेकिन एक बार अपने मन को जरूर टटोलना चाहिए।
शिविर के दौरान गुजरात अहमदाबाद के संगीतकार हार्दिक भाई शाह ने सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी गई। देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी द्वारा के तत्वावधान में आयोजित युवा शिविर में हजारों युवा एवं श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
आचार्य श्री का संकल्प शिविरों ने पूरा किया- विधायक चेतन्य काश्यप
विधायक चेतन्य काश्यप ने इस मौके पर कहा कि हमें आचार्य श्री के मार्गदर्शन में जो संस्कार मिलते हैं, वह जीवन में बहुत उपयोगी होते हैं। युवाओं में तर्कशक्ति और शिक्षा बढ़ी है। आज का युवा हर बात को विवेक और तर्क से समझना चाहता है। हमारा सौभाग्य है कि आचार्य श्री ने जब रतलाम के मंगल प्रवेश किया था और उन्होंने हजारों युवाओं को संस्कार देने के लिए जो संकल्प लिया था, वह युवा शिविरों के माध्यम से पूरा हुआ है। शिविरों में हजारों की संख्या में युवाओं ने भाग लिया और अपने मन, मस्तिष्क और जीवन में बदलाव लाने का संकल्प लिया है। श्री काश्यप न कहा कि उनका परिवार सौभाग्यशाली है कि इन शिविरों का लाभ प्राप्त करने का अवसर उन्हे प्राप्त हुआ है।



