
रतलाम,10सितम्बर(खबरबाबा .काम)। श्री साधुमार्गी जैन श्री संघ द्वारा आचार्य श्री रामलाल जी महाराज साहब के अज्ञानुवर्ती शासन दीपक श्री आदित्य मुनि जी महाराज साहब आदि ठाणा के सानिध्य में 25 भाई बहनों के मासक्षमण की तपस्या पूर्ण होने पर बहुमान किया गया।

उपरोक्त जानकारी देते हुए साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादिया ने बताया कि महासती मर्मज्ञ श्रीजी महाराज साहब के साथ 11तपस्वी व पूर्व में हुए 14 मासक्षमण तपस्वियों का बहुमान संघ द्वारा किया गया।इस अवसर पर चरित्र आत्माओं द्वारा तप की अनुमोदना तप से ही करने की प्रेरणा दी गई, जिसमें तीन दिन तक क्रोध के सौगंध, मोबाइल का त्याग, सोमवार प्रतिक्रमण, पोशध नवकारसी, ब्रह्मचर्य तेले आदि ऐसे 10 विषयों पर सभी श्रावक श्राविकाओं को नियम पालन करने के उपदेश के साथ-साथ सौगंध कारण जिसमें 10, 11 12 सितंबर को तीन उपवास तेले का आव्हान भी संघ द्वारा किया गया।
इस अवसर पर संघ अध्यक्ष सुदर्शन पिरोदिया, मंत्री दशरथ बाफना ने सभी तपस्वियों का शाब्दिक स्वागत किया व ऋषभ कटारिया, परिधि पिपलिया, मोना बरबेटा,पंकज मालवी, वर्षा चोपड़ा, कुलीन मूणत,वर्षा बोहरा, हर्ष गांधी, देशना कटारिया ,समता महिला मंडल से किरण चंडालिया ,चपरोट परिवार आदि ने अपने भाव रखें एवं तपस्वियों के लिए भजन प्रस्तुत किया।
तपस्वियों का बहुमन मदनलाल कटारिया, चन्दनमल पिरोदिया,विनोद मेहता ,निर्मल लूनिया, कांतिलाल छाजेड़ ,सुशील गोरेचा, प्रीतेश गादिया, राजेश सियार ,कमल पिरोदिया, अभय चोपड़ा, प्रकाश बोहरा, अतुल बाफना, सुमित कटारिया, विकास छाजेड़, किरण चंडालिया, सुधा बोहरा, अजय घोटा ,पंकज मूणत प्रीति मूणत, ऋषभ मूणत, इशिता चोपड़ा व संघ के पदाधिकारी महिला मंडल, बहू मंडल, समता युवा संघ ,बालक मंडल ,बालिका मंडल सभी इकाइयों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन मंत्री दशरथ बाफना ने किया व आभार विनोद मेहता ने माना। तपस्वी निर्मल भंडारी, राजकुमार मूणत, महेश मूणत, आगम चपरोट,प्रदीप जैन, सोना मालवी ,मंजुला छाजेड़, खुशबू कटारिया ,प्राची कटारिया, डॉली पटवा, सुशीला बाफना, पुष्पा पगारिया, मनीषा काठेड़, प्रियंका चोपड़ा, पल्लव घोटा, अक्षय मेहता, देवांश घोटा, परी लसोड़,वर्षा लसोड़, शिरोमणि कोठारी, राजेंद्र मूणत, खुशी पिरोदिया, नेहल श्रीश्रीमाल का संघ द्वारा सम्मान किया गया इसके अतिरिक्त महासती मर्मज्ञ श्री जी महाराज साहब के भी मासक्षमण की तपस्या पूर्ण हुई। इस पावन प्रसंग पर संघ के प्रत्येक सदस्य द्वारा उनकी सुखसात्ता पूछते हुए उनके तप की अनुमोदन की गई।



