रतलाम: कांतिलाल मंडलेचा की स्मृति में बोले वक्ता-गुणानुवाद उसी का होता है, जिसमें होते है गुण, पर्यावरण बचाने का संदेश- स्मृति में परिवारजनों ने किया नीम के पौधों का वितरण 

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रतलाम, 03 जून(खबरबाबा.काम)। जैन समाज की कई संस्थाओं में विभिन्न पदों पर रहे कांतिलाल मंडलेचा का व्यक्तित्व एवं कृतित्व विरला था। उन्होंने निस्वार्थ भाव से सर्व समाज की सेवा की। उनका निधन संपूर्ण मानव समाज के लिए अपूरणीय क्षति है। गुणानुवाद उसी का होता है, जिसमें गुण होते है।

यह विचार समता शीतल पैलेस छोटू भाई की बगीची में हुई गुणानुवाद सभा में स्व. कांतिलाल मंडलेचा का गुणानुवाद करते हुए कही। गुणानुवाद सभा में मंडलेचा परिवार की और से श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल के अध्यक्ष मनीष मंडलेचा, निलेश मंडलेचा एवं राहुल मंडलेचा ने नीम के पौधों का वितरण किया। परिवार की और से स्व कांतिलाल मंडलेचा की स्मृति में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों हेतु 5 लाख 11 हजार 111 रूपए देेने की घोषणा भी की गई।

गुणानुवाद सभा को रतलाम श्री संघ, श्री सौभाग्य तीर्थ परिसर एवं अन्य संस्थाओं की और से सुरेन्द्र गादिया, जावरा संघ के अतुल पगारिया, इंदौर से अभा फेडरेशन के महासचिव वीरेन्द्र नाहर, जैन सोश्यल ग्रुप परिवार के प्रितेश गादिया, खाद-बीज विक्रेता संघ के रमेश गर्ग, कृषि आदान विक्रेता संघ के मनोज बोराणा, खाचरौद श्री संघ के महेन्द्र चंडालिया, सैलाना श्री संघ के प्रमोद वौरा, पुत्रवधू सीए प्रणीता मंडलेचा एवं पौत्री प्रेक्षा मंडलेचा ने संबोधित किया। संचालन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत द्वारा किया गया।

प्रवर्तकश्री ने बताया जीवन अनुकरणीय

श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा ने स्व कांतिलाल मंडलेचा के निधन पर शोक संदेश भेजकर संवेदना व्यक्त की। उन्होने स्वं मंडलेचा के जीवन को अनुकरणीय बताया। संदेश का वाचन रखब चत्तर ने किया। अभिग्रहधारी श्री राजेश मुनिजी मसा ने भी संदेश भेजा। इसका वाचन संदीप चौरडिया ने किया। महासती श्री रमणीक कुंवरजी दमू, डा ललितप्रभाजी, श्री प्रगतिसुधाजी, श्री रमणीक कुंवरजी रंजन, श्री चेतनाजी,श्री महिमा जी , श्री चंदनबालाजी, श्री कल्पना जी,श्री सुमनप्रभाजी, पूज्य श्री प्रमोद मुनिजी ने भी पत्र के माध्यम से संवेदनाएं व्यक्त की। गुणानुवाद सभा में नगर की विभिन्न सामाजिक, धार्मिक,व्यापारी संस्थाओं की और से भी स्व मंडलेचा को श्रृद्धांजलि दी गई।सौरभ मूणत ने लोगस का ध्यान कराया। अंत में भवरलाल पुंगलिया ने मांगलिक श्रवण कराई। इस दौरान बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

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