
रतलाम, 17 जुलाई(खबरबाबा.काम)। चातुर्मास के पावन अवसर पर श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय रतलाम एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेतांबर पेढ़ी रतलाम के तत्वावधान में वर्धमान तपोनिधि पूज्य आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. एवं गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. साधु साध्वीगण का रतलाम में भव्य मंगल प्रवेश हुआ।

प्रवेश अवसर पर बुधवार सुबह 08ः30 बजे चांदनीचौक से भव्य चल समारोह निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से होकर सैलाना वालों की हवेली मोहन टाकीज पहुंचा, जहां भक्तिभाव के साथ आचार्य देव सहित साधु भगवंतों का आगमन हुआ। चल समारोह के दौरान सबसे आगे घुड़सवार नजर आए। उनके पीछे माताएं एवं बहने सिर पर कलश लेकर चल रही थी। जुलूस में आदिवासी संस्कृति की झलक भी नृत्य के साथ नजर आई। उसके पीछे बदनावर के बैंड द्वारा सुमधुर धुन प्रस्तुत की।

आचार्य श्री 43 वर्ष पूर्व रतलाम में दीक्षित हुए थे। उसके बाद रतलाम में उनका यह पहला चातुर्मास हो रहा है। उनके साथ गणिवर्य श्री एवं अन्य साधु मण्डल के साथ पूज्य साध्वी श्री अमीपूर्णा श्रीजी म.सा. एवं श्री अमीदर्शा श्रीजी म.सा.भी अन्य साध्वीगण के साथ रतलाम में वर्षावास करेगी।
चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन आचार्य देव के प्रवचन मोहन टॉकीज में प्रातः 9.15 बजे से 10.15 बजे तक होंगे। श्री संघ ने धर्म प्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का आह्वान किया है।
मंगल प्रवेश की धर्म सभा में आचार्य श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. ने 43 वर्ष पूर्व गुजरती उपाश्रय में हुई दीक्षा का प्रसंग सुनाया। उन्होने कहा कि इस साल श्री आंनद सागर सूरीश्वरजी महाराज की 150 वी जयंती आ रही है, हमें उसे उत्साह से मनाना है। किसी को भी अपने पूर्वजो को नहीं भूलना चाहिए। चार दिन में चातुर्मास शुरू होने वाला है , इसलिए योजना बनाओ की इस चातुर्मास में हमें क्या करना है।तप, त्याग और संयम का पालन कर जीवन को सफल बनाए।
धर्मसभा में गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा. ने कहा कि चन्दन शीतल होता है और उससे ज्यादा शीलत चंद्र है लेकिन उससे भी ज्यादा शीतल साधु होता है। चन्दन लगाने पर शीतलता देता है और चंद्र बाहर से शीतल है लेकिन साधु अंदर से भी शीतलता देते है। रतलाम वैसे तो सेव, साड़ी, सोना के लिए प्रसिद्ध है लेकिन हमारे लिए संयम के लिए है, क्योकि यही आचार्यश्री ने 43 साल पहले यहां दीक्षा ली और संसार में धर्म पताका फहराई है।
चातुर्मास में प्रतिदिन आचारांग सूत्र पर आचार्य जी के प्रवचन होंगे। रतलाम का सौभाग्य है जो उनके वचनों को सुनना मिलेगा। चातुर्मास आराधना का पर्व है, जो चलते चलते आपके पास आ गया है। अपनी आत्मा का जागरण करे। प्रतिदिन परमात्मा की वाणी सुने और आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त करे।
श्री आंनद सागर सूरीश्वरजी मसा की 150 वीं जयंती मनेगी
श्री देवसुर तपागच्छ चारथुई जैन श्री संघ गुजराती उपाश्रय रतलाम एवं श्री ऋषभदेव जी केसरीमल जी जैन श्वेतांबर पेढ़ी रतलाम द्वारा श्री आंनद सागर सूरीश्वरजी मसा की 150 वीं जयंती श्रद्धा और उल्लास से मनाई जाएगी। धर्मसभा में मुकेश जैन ने बताया कि 2 अगस्त को नाट्य मंचन होगा। 3 को गुणानुवाद सभा तथा 4 अगस्त को वरघोड़ा निकाला जाएगा। संघ अध्यक्ष विनोद मूणत ने कार्यक्रम को सफल बनाने का आव्हान किया। इंदौर से आए प्रवीण गुरूजी ने आचार्य देव श्री नयचंद्रसागर सुरीश्वर जी म.सा. एवं गणिवर्य डॉ. अजीतचंद्र सागर जी म.सा.के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला। संचालन गणतंत्र मेहता द्वारा किया गया।



