रतलाम शहर की 50 साल पुरानी‌ पीने के पानी की प्लास्टिक की पाइपलाइन बदले नगर निगम, पार्षद सलीम बागवान की पिटीशन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिया आदेश

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रतलाम,4अगस्त(खबरबाबा.काम)।नगर निगम रतलाम पीने के पानी की 476 किलोमीटर लंबी 50 साल पुरानी प्लास्टिक की पाइपलाइन को अमृत योजना दो के तहत अतिशीघ्र बदलने की कार्यवाही करें तथा जब तक पाइपलाइन नहीं बदली जाती , तब तक शहर में पीने का शुद्ध पानी देने की उचित व्यवस्था करें । यह आदेश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पार्षद सलीम मोहम्मद बागवान की पिटीशन पर दिया ।

पार्षद सलीम मोहम्मद बागवान ने रतलाम शहर में सालों से पीने का गंदा पानी वितरण करने तथा शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं करने पर नगर निगम रतलाम के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में पिटीशन दायर की थी । बागवान की ओर से जबलपुर के वरिष्ठ एडवोकेट प्रभात यादव ने पैरवी की थी ।

एनजीटी‌ ने नगर निगम रतलाम को निर्देश दिया कि वह पीने की पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच करें । तथा पाइप लाइन के लीकेज का निरीक्षण कर उन्हें तत्काल ठीक करें ।

सलीम मोहम्मद बागवान की‌ पिटीशन पर संज्ञान लेकर एनजीटी ने पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड तथा कलेक्टर रतलाम की एक ज्वाइंट कमेटी को पीने के पानी की जांच करने के आदेश दिए थे । कमेटी ने 30 जुलाई को वार्ड नंबर 24 में पीने के पानी की सप्लाई के समय निरीक्षण किया तथा अपनी रिपोर्ट में कहा की वितरण के समय प्रारंभ के कुछ मिनट तक गंदा पानी आता है । नगर निगम कमिश्नर ने कमेटी को बताया की शहर की 476 किलोमीटर लंबी पीने के पानी की वितरण लाइन प्लास्टिक की होने के साथ-साथ 50 साल पुरानी हो चुकी है । तथा उसमें कई स्थानों पर लिकेज से पानी में गंदगी मिल रही है‌।उन्होंने कहा कि वह बजट के 26.50 करोड तथा अमृत योजना दो के 72 करोड़ से शहर के पीने की जर्जर पाइप लाइन को बदलेंगे ।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने ज्वाइंट कमेटी की रिपोर्ट पर संज्ञान लेते हुए नगर निगम को जर्जर पाइप लाइन को तत्काल बदलने , पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच करने तथा पाइपलाइन के लीकेज का निरीक्षण कर तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए । साथ ही उन्होंने कलेक्टर को निर्देश दिया कि आदेश का पालन करवाने के लिए उचित तथा आवश्यक एक्शन ले ।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल को निर्देश दिया कि की वह‌ इस बात की मॉनिटरिंग करें कि नगर निगम द्वारा आदेश का पालन किया जा रहा है या नहीं । तथा पालन नहीं करने की स्थिति में वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को तत्काल सूचित करें ।

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