सार्वजनिक स्थलो पर गंदगी फैलाना पड़ेगा मंहगा, लगेगा 200 रुपए जुर्माना

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रतलाम(खबरबाबा.काम)। सार्वजनिक स्थलो पर गंदगी फैलाना, मल त्याग करना अथवा थूककर अस्वच्छ करना अब मंहगा पडेगा। ऐसा करने वालो से संबधित नगरीय निकाय 200 रुपए का जुर्माना स्वच्छता शुल्क के रूप में वसुलेंगे । इस हेतु पी.आई.सी. से अनुमोदन प्राप्त कर जिले के समस्त नगरीय निकाय जनसामान्य की जानकारी हेतु सार्वजनिक तोैर पर सूचना जाहिर कर सभी आम ओ खास जनो को सचेत करेगें ।
उक्त आशय की महत्वपूर्ण जानकारी आज जिला कलेक्टोरेट में स्वच्छता सर्वेक्षण, 2018 हेतु स्वच्छ भारत मिशन के तहत आयोजित कार्यशाला में विशेषज्ञो ने दी । कार्यशाला में बताया गया कि इस हेतु अन्तिम तिथि 31 अक्टूम्बर 2017 निर्धारित है । इसी के साथ स्वच्छता सुनिश्चित किए जाने हेतु नगरीय निकायो द्वारा पूर्व में निर्मित किए गए सार्वजनिक शौचालयो तक जलापूर्ति, उनका रखरखाव तथा उपयोग शुल्क का भी समुचित प्रंबंधन करना होगा । इन सभी कार्यवाहियों हेतु संबधित नगरीय निकायो को अंक प्रदान किए जाऐगें जिसके आधार पर उनका स्वच्छता सर्वेक्षण, 2018 हेतु स्वच्छता के पैमाने पर श्रेणी निर्धारण होगा ।
4 जनवरी से शुरु होगा स्वच्छता सर्वेक्षण
विशेषज्ञो ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण, 2018 का आयोजन 04 जनवरी 2018 से प्रारम्भ होगा जो 31 मार्च, 2018 तक जारी रहेगा । आज आयोजित कार्यशाला में श्री एस. कुमार परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण रतलाम, अनिल दसेडा अध्यक्ष नपा जावरा, श्याम बिहारी पटेल अध्यक्ष नप पिपलौदा, नरेन्द्र सोनावा अध्यक्ष नप नामली, सहायक परियोजना अधिकारी तथा मुख्य नगरपालिका अधिकारी, ताल अरूण पाठक सहित जिले के सभी सीएमओ एवं कार्यशाला के आयोजन हेतु केपीएमजी संस्था के कन्सल्टेंट योगेश जाधव एवं हिमाशु शुक्ला उपस्थित थें । श्री जाधव ने बताया कि, स्वच्छता सर्वेक्षण, 2018 में देश के 434 शहर सहित सभी राजधानियों तथा 1 लाख से अधिक आबादी वाले सभी नगरो को सम्मिलित किया जायेगा । इसके लिए देश में 5 जोन निर्धारित किए गए है जिसमें से पश्चिमी जोन के अन्तर्गत 1157 शहर शामिल है एवं रतलाम जिले के नगरीय निकायो का भी इसी जोन के अन्तर्गत नाम शामिल है । विशेषज्ञो ने टिप्स दिए कि, किस प्रकार नगरीय निकाय स्वच्छता सर्वेक्षण में अधिक से अधिक अंक प्राप्त कर सकते है । इसके लिए डाक्युमेंटेशन, प्रत्यक्ष अवलोकन, नागरिक प्रतिक्रिया तथा स्वच्छता एप के जरिये नागरिको की प्रतिक्रियाओ के माध्यम से स्वच्छता सर्वेक्षण दलों द्वारा नगरो के अंको का निर्धारण होगा ।
अलग-अलग अंक निर्धारित
विशेषज्ञो ने बताया कि, कचरा संग्रहण व ट्रांसपोर्टेशन हेतु सर्वाधिक 1400 अंक, गीला तथा सूखा कचरा पृथक्कीकरण, जैविक कचरे की स्थलीय कम्पोस्टिंग निवासी/ रहवासी कल्याण संघो द्वारा थोक कचरा उत्पादको के प्रतिशत तथा आईईसी एजेंसी नियुक्त किए जाने हेतु पृथक पृथक अंक निर्धारित किए गए है । यह अंक स्वच्छता के पैमाने में नगरो की श्रेणी निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगें । अन्य बिन्दु जिन पर श्रेणी निर्धारण का दारोमदार होगा वे कचरा गाडियों पर जीपीएस लगवाना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अनुरूप सार्वजनिक स्थलो पर सूखे तथा गीले कचरे हेतु जुडवा कुडेदान की उपलब्धता कराना, नगरीय निकायो के कर्मचारीयों हेतु बायोमेट्रिक प्रणाली द्वारा उपस्थिति दर्ज कराकर वेतनपत्रक बनाना, ओडीएफ (खुले में शौच मुक्ति), लैण्डफिल साईट का निर्माण आदि विभिन्न मुददे शामिल है । विशेषज्ञो ने बताया कि, जो भी व्यवसायिक क्षैत्र है उनमें रात्रिकालीन सफाई अनिवार्य है साथ ही पेट्रोल पंप में निर्मित शौचालयो केा स्वच्छ रखतें हुए जनसामान्य के लिए सुलभ कराना एवं तदाशय की सूचना प्रकाशित कराना भी स्वच्छता सर्वेक्षण, 2018 का अहम हिस्सा रहेगा । आगामी 31 अक्टूम्बर 2017 के पूर्व मैरिजगार्डन, मन्दिर, होटल्स से निकलने वाले 50 किलो से अधिक कचरे का स्थल पर ही कम्पोस्टिंग कराना अनिवार्य होगा । विशेषज्ञो ने जोर दिया कि, नगरीय निकायो को स्वछता सर्वेक्षण में अंको की प्रतिस्पर्धा में शामिल होना होगा ।

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