वर्षा पूर्व खतरनाक एवं जर्जर भवनों को धराशायी किया जाएगा, कलेक्टर ने आपदा प्रबंधन की बैठक में दिए निर्देश, बाढ़ तथा अतिवृष्टि से निपटने के लिए चाक-चौबंद इंतजाम करने के भी निर्देश दिए।

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रतलाम,8जून(खबरबाबा.काम)। वर्षा के पूर्व जिले में सभी प्रबंधन सुनिश्चित किए जाएं। अतिवृष्टि तथा बाढ़ की स्थिति में किए जाने वाले सभी इंतजाम चाक-चौबंद रखे जाएं। जिले में खतरनाक एवं जर्जर भवनों को चिन्हांकित करते हुए धराशायी किया जाए।
यह निर्देश कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने आज सम्पन्न आपदा प्रबंधन तैयारियों की बैठक में जिले के सभी एसडीएम तथा नगर पालिका अधिकारियों को दिए। बैठक में एसपी अमितसिंह, अपर कलेक्टर डा. कैलाश बुन्देला, एसडीएम अनिल भाना, श्रीमती नेहा भारती तथा विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर ने बैठक में निर्देश दिए कि वर्षा के पूर्व जरूरी सामग्री स्टोरेज कर ली जाए। कम्युनिकेशन प्लान तैयार किया जाए। जिले से लेकर गांव स्तर तक के दूरभाष क्रमांक सूचीबद्ध किए जाएं। वर्षा के दौरान बाढ़ संभावित स्थलों को चिन्हांकित कर लिया जाए। एसडीएम अपने क्षेत्रों में आवश्यक बैठकें आयोजित करें। जिले तथा अनुभाग स्तर के कंट्रोल रुम सात दिवस में स्थापित कर लिए जाएं। बाढ़ की स्थिति में पुलिस मेनटेक्स सिस्टम तथा वायरलेस जैसे उपकरण भी राहत दलों को उपलब्ध हों। भारी वर्षा की चेतावनी समय सीमा में जारी करने के लिए एसएमएस तंत्र का इस्तेमाल किया जाएगा। रेलिंग विहीन पुल-पुलियाओं को अभी से दुरुस्त कर लिया जाए। बाढ़ के दौरान लोगों को ठहराने के लिए स्कूलों तथा धर्मशालाओं को चिन्हित कर लिया जाए। इस दौरान लोगों के भोजन तथा कपडों के लिए भी अभी से योजना तैयार की जाए।
कलेक्टर ने जिला होमगार्ड को तैराक,गोताखोरों, नाव, जैकेट, रस्से, टार्च इत्यादि रेस्क्यू सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने, स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दवाईयों की व्यवस्था,एम्बूलेन्स, आपात चिकित्सा व्यवस्था,पैरामेडिकल स्टाफ, पशु चिकित्सा विभाग को मृत पशुओ के पोस्टमार्टम की व्यवस्था, विद्युत वितरण कम्पनी को अबाधित विद्युत आपूर्ति,विद्युत दुर्घटना से सुरक्षा आदि के लिए निर्देशित किया।
पुलिस अधीक्षक अमितसिंह ने वर्षा के दौरान तेज बहाव के पानी में वाहनों के आवागमन को रोकने, पेडों के गिरने की स्थिति में रोड बाधित होने पर किए जाने वाले रेस्क्यू के सम्बन्ध में दिशा-निर्देशित किया। इसके साथ ही कुओं को ढंकवाने तथा नल-जल योजना के पानी को दूषित होने से बचाने तथा बाढ़ के दौरान लोगों को शुद्ध पानी की व्यवस्था के भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए।

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