रतलाम: रॉयल हॉस्पिटल में हुआ चिकित्सकों की सीएमई का आयोजन, चेयरमैन प्रमोद गूगालिया ने कहा-‘सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाने की तैयारी’, ‘कम से कम खर्चे में इलाज करना प्राथमिकता’

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रतलाम,22मई(खबरबाबा.काम)। रॉयल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेन्टर सालाखेड़ी पर एक दिवसीय ऐलोपेथी के चिकित्सकों की सीएमई का आयोजन गत रात्रि सम्पन्न हुआ। सीएमई के मुख्य अतिथि जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रतलाम डॉ. प्रभाकर नानावरे रहे तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में रतलाम सिविल सर्जन डॉ आनंद चंदेलकर एवं डॉ निर्मल जैन उपस्थित रहे। अध्यक्षता रॉयल हॉस्पिटल के चेयरमेन प्रमोद गुगालिया ने की।

सभी अथितियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष प्रमोद गुगालिया, रॉयल ग्रुप के डायरेक्टर डॉं. उबेद अफजल एवं रॉयल हॉस्पिटल के डॉक्टर्स क्रमशः डॉं. शमशुल हक, डॉ आदित्य पाटीदार, डॉ आशिता ठाकुर ने किया।

अपने स्वागत भाषण में संस्था के चेयरमेन प्रमोद गुगालिया ने बताया कि, उनका हॉस्पिटल सर्वसुविधायुक्त है और यहॉ अत्याधुनिक जॉंच मशीनें स्थापित की गयी है। उन्होनें बताया कि, गरीबों का कम से कम राशि में ईलाज करना हमारी प्राथमिकता है। उन्होनें यह भी बताया कि, आगामी महीनों में वो रॉयल हॉस्पिटल को सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के रूप में तैयार करने जा रहे है, ताकि रतलाम और आस पास के मरीजों को बडे़ शहरों में जाकर महंगा ईलाज ना करवाना पड़े।

मुख्य अतिथि डॉ. प्रभाकर नानावरे ने इस आयोजन की प्रशंसा की तथा उन्होनें सीएमई के माध्यम से मेडिकल साइंस के क्षेत्र में नई बीमारियों के संबंध में जानकारी दी एवं स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया। सीएमई से एक हेल्थ वर्कर को रोगी देखभाल में सुधार करने के लिए व्यवहार तरीके सीखने और खोजने की अनुमति देता है, और प्रभावी ढंग से प्रबंधन करता है। इस तरह के ओर भी आयोजन किए जाने चाहिए। उन्होनें रॉयल ग्रुप के चेयरमैन श्री प्रमोद गुगालिया को उनके हॉस्पिटल द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में लगातार निःशुल्क केम्प आयोजित करने के कार्य की सराहनाह की एवं इस सीएमई के आयोजन पर धन्यवाद ज्ञापित किया।

सीएमई के मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. पवन कुमार शर्मा – एसोसिएट प्रोफेसर, शा. मेडिकल कॉलेज, रतलाम ने सीएसएफ राइनोरिया पर उद्बोधन दिया। उन्होंने बताया कि सीएसएफ राइनोरिया के पेशेंट को कभी भी इग्नोर नहीं करना चाहिए, यदि रोगी की नाक से साफ पानी आ रहा है तो, उसकी नियमित और व्यवस्थित जांच की जानी चाहिए उसे साधारण सर्दी जुखाम ना समझा जाए एवं चिकित्सक के देख-रेख में उसका व्यवस्थित इलाज शुरू किया जाना चाहिए।

दूसरे वक्ता के रूप में डॉ धु्रवेन्द्र पांडे – एसोसिएट प्रोफेसर, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज रतलाम ने ट्यूबरकुलोसिस प्रीवेंटिव थेरेपी पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि ट्यूबरक्लोसिस प्रिवेंटिव थेरेपी, पल्मोनरी टीबी के मरीज के घरवालों को दी जाती हैं ताकि उनको आगे यह बीमारी नही हो। यह शासन द्वारा मुफ्त में प्रदान किया जाता हैं। यह ट्यूबरक्लोसिस प्रिवेंटिव थेरेपी भारत को टीबी मुक्त करने के लिए अति आवश्यक हैं।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉं प्रमोद प्रजापति द्वारा डेंगू बीमारी के जांच लक्षण उपचार के संबंध में जानकारी दी गई तथा सभी मेडिकल संस्थाओं से अपेक्षा की गई कि, किसी भी संदिग्ध डेंगू पेशेंट की जानकारी, केस इन्वेस्टिगेशन फॉर्म के साथ, जिला चिकित्सालय में उपलब्ध मैक एलाइजा मशीन द्वारा जांच हेतु भेजना सुनिश्चित करें। यदि किसी मरीज का रैपिड कार्ड टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो उसे वैलिड ना मानते हुए उसकी भी जानकारी आईडीएसपी और मलेरिया कार्यालय को देना सुनिश्चित करने हेतु सलाह भी दी।

कार्यक्रम में विभिन्न चिकित्सकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर वक्ताओं ने दिये। कार्यक्रम का संचालन रॉयल हॉस्पिटल के प्रशासक दिनेश राजपुरोहित तथा आभार डायरेक्टर डॉं. उबेद अफजल ने माना।

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